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समाचार लेखन और छह ककार|पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया

   पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया 






              पत्रकारीय लेखन क्या है ?  

अखबार अथवा अन्य समाचार माध्यमों में काम करनेवाले पत्रकार अपने पाठकों, दर्शकों और श्रोताओ तक सूचनाएँ पहुँचने  लिए लेखन के विभिन्न रूपों का प्रयोग करते हैं इसे ही पत्रकारीय लेखन कहते हैं। 


   पत्रकारीय लेखन कितने प्रकार के होते है ?

    पत्रकारीय लेखन के तीन प्रकार के होते हैं। 

i) पूर्णकालिक पत्रकार

ii) अंशकालिक पत्रकार

iii) फ्रीलांसर पत्रकार







                पूर्णकालिक पत्रकार

पूर्णकालिक पत्रकार किसी समाचार संगठन में कार्य करनेवाला नियमित वेतनभगी कर्मचारी होता हैं। 


              अंशकालिक पत्रकार

अंशकालिक पत्रकार किसी समाचार संगठन के लिए एक निश्चित मानदेय पर काम करनेवाला पत्रकार होता है।


              फ्रीलांसर पत्रकार

फ्रीलांसर पत्रकार का संबंध किसी विशेष अखबार से नहीं होता है बल्कि वह भुगतान के आधार पर भिन्न-भिन्न समाचार पत्रों के लिए लिखता है।

○ पत्रकारीय लेकिन का संबंध और क्षेत्र समसामयिक और वास्तविक घटनाओं, समस्याओं और मुद्दों से है।

○ समाचार पत्र और पत्रिका के लिखने वाले लेखक और पत्रकार को हमेशा यह याद रखना चाहिए कि वह विशाल समुदाय के लिए देख रहा है जिसमें एक विश्वविद्यालय के कुलपति जैसे विद्वान से लेकर कम पढ़ा -लिखा मजदूर और किसान सभी प्रकार का पाठक वर्ग शामिल है। इसलिए उसकी लेखन शैली, भाषा और गुड़ से गूड़ विषय की प्रस्तुति इतनी सहज, सरल और रोचक होनी चाहिए कि वह आसानी से सबकी समझ में आ जाए।





             समाचार कैसे लिखा जाता है ?

समाचार लेखन पत्रकारीय लेखन का सबसे जाना -पहचाना
रूप है। आमतौर पर अखबारों में पूर्णकालिक और अंशकालिक पत्रकार समाचार लिखते हैं, जिन्हें संवाददाता या रिपोर्टर भी कहते हैं।

• अखबारों में प्रकाशित अधिकांश समाचार एक विशेष शैली में लिखी जाती हैं। 

 • समाचारों में किसी भी घटना, समस्या अथवा विचार से सबसे महत्वपूर्ण तथ्य, सूचना या जानकारी को सबसे पहले पैराग्राफ़ में लिखा जाता है। इससे कम महत्वपूर्ण सूचना यह तथ्य की जानकारी उसके बाद पैराग्राफ़ में दी गई है। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक समाचार समाप्त नहीं हो जाता।

• समाचार लेखन की इस विशेष शैली को उल्टा पिरामिड-शैली के नाम से जाना जाता है। यह समाचार लेखन की सबसे लोकप्रिय उपयोगी और बुनियाद शैली है। 

• समाचार लेखन की इस शैली उल्टा पिरामिड इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें सबसे महत्वपूर्ण तथ्य या सूचना यानी क्लाइमैक्स पिरामिड के सबसे निचले भाग में नहीं होती है बल्कि इस शैली पिरामिड को उल्टा दिया जाता है।


 
            उल्टा पिरामिड में समाचार का ढांचा 

 • इस शैली का पयोग 19 वीं सदी के मध्य में ही प्रारम्भ हो गया था परन्तु इसका विकास अमेरिका में गृहयुद्ध के दौरान हुआ। 


               समाचार लेखन और छह ककार 


•किसी भी समाचर को लिखते समय मुख्य रूप से छह प्रश्नों का जवाब देने की कोशिश की जाती है क्या हुआ,किसके साथ हुआ ,कहा हुआ ,कब हुआ कैसे हुआ और क्योँ हुआ ? इस-क्या ,किसके ,कहाँ कब,क्यों और कैसे _को छह ककारों के नाम से भी जाना जाता है। किसी घटना, समस्या विचार से संबंधित अखबार को लिखते समय छह ककारों तू ही ध्यान में रखा जाता है।

• समाचार के इंट्रो अर्थात पहले पैराग्राफ़ अथवा शुरुआती दो- तीन पंक्तियों में आमतौर पर तीन या चार ककारों को आधार बनाकर अखबार लिखी जाती है। ये चार ककार हैं- क्या, किससे या कौन, कब और कहाँ ? इसके बाद समाचार की बॉडी में और समापन के पहले बाकी दो ककारों - कैसे और क्यों- का जवाब दिया जाता है। इस प्रकार है छह ककारों के आधार पर समाचार को तैयार किया जाता है।



                  फीचर क्या है ?

फीचर एक सुव्यवस्थित, सृजनात्मक और आत्मनिष्ठ लेखन होता है जिसका उद्देश्य पाठकों को सूचना देना, शिक्षित करना एवं मुख्य रूप से उसका मनोरंजन करना होता है।

• समाचार लिखते समय रिपोर्टर उसमें अपने विचार नहीं डाल सकता है जबकि फीचर लिखते समय लेकर अपने राय याद सिटी कौन ऑफ भावनाएँ जाहिर कर सकता है। 

• फीचर लेखन में उल्टा पिरामिड- शैली का प्रयोग नहीं होता है अर्थात फीचर लेखन का कोई एक निश्चित ढांचा या फार्मूला नहीं होता है।

• समाचारों के विपरीत फीचर लेखन की भाषा सरल, आकर्षक और मन को छूनेवाली होती है।

• अखबारों तथा पत्रिकाओं में 250 शब्दों से लेकर 2000 शब्दों तक के फीचर छपते हैं।




                   फीचर कैसे लिखें ?

फीचर लिखते समय कुछ बातों को ध्यान में रखना बहुत आवश्यकता होता है।

1) फीचर को सजीव बनाने के लिए उसमें उस विषय से संबंधित लोगों अर्थात पात्रों की मौजूदगी आवश्यक है।

2) कहानी को उनके माध्यम से कहने की कोशिश कीजिए अर्थात पात्रों के माध्यम से उस विषय के विभिन्न पहलुओं को सामने लाइए।

3) कहानी को बताने का अंदाजा ऐसा होना चाहिए कि आपके पाठक यह महसूस कर सके कि वे उसे स्वयं देख और सुन रहे हैं।

4) फीचर को मनोरंजक बढ़ाने के साथ-साथ सूचनात्मक बनाना चाहिए।

• फीचर विभिन्न प्रकार के होते हैं।इनमें समाचार बैकग्राउंड, खोजपरक फीचर, साक्षात्कार फीचर, जीवनशैली फीचर, व्यक्तिगत फीचर, यात्रा फीचर होते हैं। 

• फीचर लेखक का कोई निश्चित ढांचा या फार्मूला नहीं होता है। इसलिए आप फीचर लेखन कहीं से शुरू कर सकते हैं।


             विशेष रिपोर्टर कैसे लिखें ?

समाचार पत्रों तथा पत्रिकाओं में सामान्य समाचारों के अतिरिक्त गहरी छानबीन, विश्लेषण और भाषा के आधार पर विशेष रिपोर्टें दीप प्रकाशित होती हैं।

• विशेष रिपोर्टं को तैयार करने के लिए किसी घटना, समस्या या मुद्दे की गहरी छानबीन की जाती है।

• विशेष रिपोर्ट के विभिन्न प्रकार की होती है इनमें खोजी रिपोर्ट, इन-डेप्थ रिपोर्ट, विश्लेषणात्मक रिपोर्ट और विवरणात्मक रिपोर्ट, विशेष रिपोर्टें के कुछ प्रमुख प्रकार हैं।

• विशेष रिपोर्ट का प्रयोग भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और गड़बड़ियों को उजागर करने के लिए किया जाता है।

     
               विचारपरक लेखन

अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित होने वाले संपादकीय, टिप्पणियां विचारपरक लेखन में आते हैं।


                संपादकीय लेखन

संपादकीय दृष्टि पर प्रकाशित होने वाले संपादकीय को उस समाचार पत्र की आवाज माना जाता है।

• संपादकीय के द्वारा समाचार पत्र किसी घटना, समस्या या मुद्दे के प्रति अपनी राय को प्रकट करता है।

• संपादकीय को किसी के नाम के साथ नहीं छापा जाता क्योंकि यह किसी व्यक्ति विशेष का विचार नहीं होता है।

• चंपा देके को लिखने की जिम्मेदारी उस अखबार में काम करने वाले संपादक तथा उनके सहयोगियों की होती है। 


                   स्तंभ लेखन

कुछ लेखन अपने वैचारिक रुझान और लेखन शैली के लिए पहचाने जाते हैं। ऐसे लेखकों की लोकप्रियता देखकर समाचार पत्र उन्हें एक नियमित स्तंभ लेखन का जिम्मा देता है।
•स्तंभ लेखन का विषय चुनने एवं उनमें अपने विचार व्यक्त करने की लेखक को पूर्ण छूट होते हैं।

         
                संपादक के नाम पत्र

यह अखबार का एक स्थायी स्तंभ है जिससे जरिए पाठक विभिन्न मुद्दों पर न सिर्फ अपनी राय प्रकट करता है अपितु जन समस्याओं को भी उठाता है। 

                         लेख

•लेख विशेष रिपोर्ट और फीचर से इस मामले में विभिन्न होते है कि उसमें लेखक को विचारों को प्रमुखता दी जाती है। परंतु लेखक के ये विचार तथ्यों और सूचनाओं पर आधारित होते हैं और लेखक उन तथ्यों और सूचनाओं के विश्लेषण और अपने तर्कों के द्वारा अपनी राय को प्रस्तुत करता है। 

• किसी लेख को लिखने के लिए पर्याप्त तैयारी की आवश्यकता होती है। 


                       इंटरव्यू

• समाचार माध्यमों में इंटरव्यू का बहुत बड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। 

• इंटरव्यू में एक पत्रकार किसी अन्य व्यक्ति से तथ्य, उसकी राय और भावनाएँ जानने के लिए प्रशन पूछता है। 

• एक सरल इंटरव्यू के लिए आपके पास न केवल ज्ञान होना आवश्यक है बल्कि आपके अंदर संवेदनशीलता, कूटनीति, धैर्य और साहस जैसे गुण भी होना चाहिए।







                                          





 

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